7 अगस्त 2021 - 19:04
हीरोशीमा पर परमाणु बमबारी मानवता के विरुद्ध अमेरिका के महापराध की वर्षगांठ हैः ईरान

ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि जापान के हीरोशीमा नगर पर परमाणु बमबारी की 76वीं वर्षगांठ मानवता के विरुद्ध अमेरिका के महापराध की याद है।

सईद ख़तीबज़ादे ने कहा कि हीरोशीमा की घटना इस वास्तविकता को बयान करती है कि अमेरिका अपने अवैध हितों की प्राप्ति के लिए किसी भी अमानवीय कृत्य की अनदेखी नहीं करता।

उन्होंने कहा कि यह कुट व हृदयविदारक घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि दुनिया को परमाणु हथियार रहित बनाया जाना चाहिये और इस प्रकार का हथियार विश्व की शांति व सुरक्षा के लिए ख़तरा व चुनौती है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित विश्व के परमाणु हथियार सम्पन्न देशों ने अंतरराष्ट्रीय समझौतों विशेषकर परमाणु हथियार अप्रसार संधि एनपीटी के परिप्रेक्ष्य में यह वचन दिया है कि वे इन हथियारों का निरस्त्रीकरण करेंगे परंतु आज तक इस दिशा में न केवल कोई गम्भीर कदम नहीं उठाया गया है बल्कि इन हथियारों को और विकसित व आधुनिकतम बनाये जाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ईरान एक बार फिर परमाणु हथियारों के निरस्त्रीकरण पर बल देता है और इन हथियारों से निरस्त्रीकरण की दिशा में किये जाने वाले प्रयास का समर्थन करता है।

नोटः ज्ञात रहे कि अमेरिका ने वर्ष 1945 में जापान के हीरोशीमा और नागासाकी नगरों पर जो परमाणु बमबारी की थी उसमें दो लाख से अधिक लोग मारे गये थे और अमेरिका ने आज तक अपने इस महापराध के लिए जापान से क्षमा तक नहीं मांगी है जबकि वह विश्व में स्वंय को मानवाधिकार की रक्षा का सबसे बड़ा ठिकेदार समझता है।

बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि जो अमेरिका हज़ारों नहीं बल्कि लाखों निर्दोष लोगों के खून का ज़िम्मेदार है वह मानवाधिकार के बारे में बात करने के लाएक़ नहीं है।

यही नहीं बहुत से जानकार हल्के अमेरिका के इस अमानवीय कृत्य को महाआतंकवाद की संज्ञा देते हैं और विश्व में एकमात्र अमेरिका है जिसने परमाणु हथियारों का प्रयोग किया है और बड़ी निर्लज्जता से वह स्वयं को विश्व का एक ज़िम्मेदार देश भी बताता और समझता है और अपने राजनीतिक हितों के दृष्टिगत दूसरे देशों में मानवाधिकारों के हनन के संबंध में रिपोर्टें भी जारी करता रहता है।

नोटः यह व्यक्तिगत विचार हैं। इनसे पार्सटूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं है।